Friday, June 29, 2018

जानिए क्या है सुकन्या समृद्धि योजना- कैसे लें योजना का लाभ


 
* सुकन्या समृद्धि योजना अकाउंट में बेटी के नाम से एक साल में 1 हजार से लेकर 1 लाख पचास हजार रुपए जमा कर सकता है।
 
* यह पैसा अकाउंट खुलने के 14 साल तक ही जमा करवाना होगा और यह खाता बेटी के 21 साल की होने पर ही मैच्योर होगा।
 
* योजना के नियमों के अंतर्गत बेटी के 18 साल के होने पर आधा पैसा निकलवा सकते हैं।
 
* 21 साल के बाद खाता बंद हो जाएगा और पैसा पालक को मिल जाएगा।
 
* अगर बेटी की 18 से 21 साल के बीच शादी हो जाती है तो अकांउट उसी वक्त बंद हो जाएगा।
 
* अकाउंट में अगर पेमेंट लेट हुई तो सिर्फ 50 रुपए की पैनल्टी लगाई जाएगी।
 
* पोस्ट ऑफिस के अलावा कई सरकारी व निजी बैंक भी इस योजना के तहत खाता खोल रही हैं। 
 
* सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खातों पर आयकर कानून की धारा 80-जी के तहत छूट दी जाएगी।
 
* पालक अपनी दो बेटियों के लिए दो अकाउंट भी खोल सकते हैं।
 
* जुड़वां होने पर उसका प्रूफ देकर ही पालक तीसरा खाता खोल सकेंगे। पालक खाते को कहीं भी ट्रांसफर करा सकेंगे।
 
योजना के अंतर्गत 2015 में कोई व्यक्ति 1,000 रुपए महीने से अकाउंट खोलता है तो उसे 14 साल तक यानी 2028 तक हर साल 12 हजार रुपए डालने होंगे। मौजूदा हिसाब से उसे हर साल 8.6 फीसदी ब्याज मिलता रहेगा तो जब बच्ची 21 साल की होगी तो उसे 6,07,128 रुपए मिलेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि 14 सालों में पालक ने अकाउंट में कुल 1.68 लाख रुपए ही जमा करने पड़े। बाकी के 4,39,128 रुपए ब्याज के हैं।
योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज:
 
* बच्ची का जन्म प्रमाणपत्र
* एड्रेस प्रूफ 
* आईडी प्रुफ

मोदी जी ने तो नोटबंदी से आतंकवाद और काले धन की कमर तोड़ दी थी ??? #15_नहीं_30लाख_आयेंगे 🤣

Thursday, June 28, 2018

#15_नहीं_30लाख_आयेंगे

2 Minutes Silence for Voted for Modi, thinking that he ll Deposit 15 - 15 lakh in each account 🤣🤣 

मोदी जी ने तो नोटबंदी से आतंकवाद और काले धन की कमर तोड़ दी थी ???

शरद यादव ने कहा- 'राम मंदिर में मेरी आस्था नहीं और सीएम योगी घंटा बजाएं'

बाराबंकी: राम मंदिर का मुद्दा पूरी तरह से गरमा गया है. JDU (जनता दल यूनाइटेड) नेता शरद यादव ने बाराबंकी में राम मंदिर के मुद्दे पर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि राम मंदिर में उनकी कोई आस्था नहीं है, वे केवल जिंदा इंसानों की पूजा करते हैं. प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि उनका काम घंटा बजाना है, इसलिए वे घंटा बजाएं. इनलोगों को संविधान से कोई मतलब नहीं है. राम मंदिर के नाम पर लोगों को गुमराह किया जा रहा है. शरद यादव पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलने बाराबंकी पहुंचे थे.
अपने बयानों पर सफाई देते हुए शरद यादव ने कहा कि संविधान में कहीं भी इसका जिक्र नहीं है. जब, संविधान में ही उसका जिक्र नहीं किया गया है तो मैं उनकी पूजा क्यों करूं ? भारतीय संविधान में इन बातों का कोई मतलब नहीं है.

स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 50 फीसदी वृद्धि के साथ 7000 करोड़ रुपये हुआ: SNB

विष्णु त्रिपाठी की रिपोर्ट 

ज्यूरिखकालेधन में कमी का दावा करने वाली मोदी सरकार के लिए स्विस नैशनल बैंक (SNB) की ओर से जारी रिपोर्ट बड़े झटके की तरह है। इसके मुताबिक, स्विस बैंकों में भारतीयों का धन 50% बढ़कर लगभग 7000 करोड़ रुपये हो गया है। भारतीयों द्वारा स्विस बैंक खातों में सीधे तौर पर रखा गया धन बढ़कर 99.9 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 6,900 करोड़ रुपये) और दूसरों के माध्यम से जमा कराया गया धन भी बढ़ कर 1.6 करोड़ स्विस फ्रैंक (करीब 110 करोड़ रुपये) हो गया है। आंकड़ों के अनुसार स्विट्जरलैंडके बैंक खातों में विदेशी ग्राहकों का कुल धन 1460 अरब स्विस फ्रैंक (करीब 100 लाख करोड़ रुपये) से अधिक है।

जीएसटी में बड़े पैमाने पर कर चोरी, दो महीने में 2,000 करोड़ की चोरी का खुलासा

विष्णु त्रिपाठी की रिपोर्ट ! वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली की जांच शाखा ने दो महीने के भीतर 2,000 करोड़ रुपये की कर चोरी का पर्दाफाश किया है। आंकड़ों के विश्लेषण से यह भी खुलासा हुआ है कि पंजीकृत 1.11 करोड़ से अधिक कारोबारियों में से केवल एक फीसदी ने ही 80 फीसदी करों का भुगतान किया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह जानकारी दी। सीबीआईसी के सदस्य जॉन जोसेफ ने कहा कि जीएसटी रिटर्न फाइलिंग के दौरान गलती करने वाले छोटे कारोबारियों के विपरीत बहुराष्ट्रीय व बड़े कारपोरेट ने भी गलतियां की हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप कर अदा करने के तरीके पर गौर करें, तो यह सतर्क करने वाली तस्वीर पेश करता है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी है कि सिस्टम में कहां खामी है।
 
कम्पोजिशन योजना का ले रहे बेजा फायदा
औद्योगिक संगठन एसोचैम द्वारा आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए जोसफ ने कहा कि कम्पोजिशन डीलर्स के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि उनमें से अधिकतर का वार्षिक कारोबार 5 लाख रुपये का है। इससे पता चलता है कि जीएसटी को सही ढंग से लागू करने की अभी और जरूरत है। कम्पोजिशन स्कीम के तहत कारोबारियों और उत्पादकों को 1 फीसदी की कम दर पर टैक्स चुकाने की अनुमति है, जबकि रेस्तरां मालिकों को 5 फीसदी की दर से जीएसटी भुगतान करना पड़ता है। यह योजना उत्पादकों, रेस्तरां और व्यापारियों के लिए खुली है, जिनका कारोबार 1.5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं है।
 
फर्जी चालान से हो रहा रिफंड का दावा
जोसफ ने कहा कि जांच से पता चला है कि योजनाबद्ध तरीके से माल के लिए फर्जी चालान तैयार किए जा रहे हैं, लेकिन माल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। इन चालानों के आधार पर कुछ कंपनियां इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा भी कर रही हैं। इसके अलावा, सामान का वास्तव में निर्यात किए बिना कुछ कंपनियां फर्जी चालानों के आधार पर जीएसटी रिफंड का दावा भी कर रही हैं।
 
बहुत छोटे हिस्से की चोरी का चल पाया है पता
जोसफ ने कहा कि हमने एक-दो महीने की अल्प अवधि में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की चोरी का पता लगाया है, जो बहुत थोड़ा है। एक तरह से चोरी के पहाड़ का शीर्ष भर है, जो दूर से दिखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जीएसटी इंटेलिजेंस विंग जीएसटी चोरी रोकने के लिए व्यापक स्तर पर कार्रवाई करने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए तकनीक की भी मदद ली जाएगी।

Vodafone का सबसे सस्ता पोस्टपेड प्लान जियो को देगा मात, 20GB डाटा मात्र 299 रु में

नई दिल्ली (विष्णु त्रिपाठी की रिपोर्ट)। वोडाफोन इंडिया ने जियो के टक्कर देने के लिए 299 रुपये का रेड पोस्टपेड प्लान पेश किया है। इसके तहत अनलिमिटेड कॉल्स और डाटा समेत कई बनेफिट्स दिए जा रहे हैं। यह प्लान जियो के 199 रुपये के प्लान की टक्कर में उतारा गया है। जानें इन दोनों प्लान्स की डिटेल्स:
वोडाफोन 299 रेड पोस्टपेड प्लान की डिटेल्स:
इस प्लान के तहत यूजर्स को अनलिमिटेड लोकल-एसटीडी और रोमिंग कॉल्स दी जा रही हैं। साथ ही 100 एसएमएस भी दिए जा रहे हैं। इस प्लान में 50 जीबी तक डाटा रोलओवर किया जा सकेगा। यूजर्स को 20 जीबी डाटा 3जी/4जी डाटा उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही 12 महीनों के लिए वोडाफोन प्ले सब्सक्रिप्शन भी फ्री मिलेगा। वोडाफोन कंपनी ने बताया कि इस प्लान में जितने भी बेनिफिट्स दिए जा रहे हैं उनकी कुछ कीमत 2400 रुपये है। इस प्लान का लाभ My Vodafone app से उठाया जा सकता है। यह प्लान फिलहाल कंपनी की वेबसाइट पर उपलब्ध नहीं है।
जियो के 199 रुपये के पोस्टपेड प्लान की डिटेल्स:

वोडाफोन 299 रुपये का प्लान जियो के 199 रुपये के प्लान को टक्कर देने के लिए पेश किया गया है। जियो के 199 रुपये के प्लान के तहत 25 जीबी 4 जीबी 4जी डाटा दिया जा रहा है। इसके साथ ही अनलिमिटेड वॉयस कॉल्स समेत 100 एसएमएस भी दिए जा रहे हैं। इसके अलावा जियो की सभी एप्स का फ्री सब्सक्रिप्शन भी दिया जाएगा। इस प्लान के लिए यूजर्स को 250 रुपये की सिक्योरिटी देनी होगी जो 100 फीसद रिफंडेबल है।

इस शेयर से तगड़ी कमाई, 40% का रिटर्न संभव

मार्केट एक्सपर्ट विष्णु त्रिपाठी  ने टॉप पिक के तौर पर सिम्फनी का शेयर चुना है और इसमें लंबी अवधि के नजरिए से खरीदारी की सलाह दी है। उनका मानना है कि 1 साल की अवधि में सिम्फनी के शेयर में 2,000 रुपये तक का भाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सिम्फनी का शेयर 1,420 रुपये के पास कारोबार कर रहा है।

सुदीप बंदोपाध्याय ने बताया कि कूलर की डिमांड बढ़ने से सिम्फनी के आय की ग्रोथ बढ़ी है। कंज्यूमर ड्युरेबल्स की खरीदारी के लिए फाइनेंस के विकल्प बढ़ गए हैं जिससे सिम्फनी को फायदा संभव है। साथ ही कंपनी ने इनोवेटिव प्रोडक्ट भी बाजार में उतारे हैं। कंपनी का डिस्ट्रिब्यूशन भी बढ़ा है। डिस्ट्रिब्यूशन बढ़ने से कंपनी का मार्केट शेयर बढ़ा है।

बेहतरीन कमाई वाले 22 शेयर


ब्रिटानिया : खरीदें - 6068, लक्ष्य - 6100, स्टॉपलॉस - 6060

पेट्रोनेट एलएनजी : बेचें - 205, लक्ष्य - 198, स्टॉपलॉस - 208

जस्ट डायल : बेचें - 533, लक्ष्य - 515, स्टॉपलॉस - 538

अरविंदो फार्मा : बेचें - 614, लक्ष्य - 600, स्टॉपलॉस - 617

वॉकहार्ट : बेचें - 643, लक्ष्य - 625, स्टॉपलॉस - 648

सीईएससी : बेचें - 930, लक्ष्य - 915, स्टॉपलॉस - 935

दीपक नाइट्रेट : खरीदें - 239, लक्ष्य - 250, स्टॉपलॉस - 236

बाटा : बेचें - 835, लक्ष्य - 815, स्टॉपलॉस - 840

गोदरेज कंज्यूमर : खरीदें - 1209, लक्ष्य - 1225, स्टॉपलॉस - 1202

ट्राइडेंट : खरीदें - 55, लक्ष्य - 60, स्टॉपलॉस - 54

आईजीएल : बेचें - 253, लक्ष्य - 245, स्टॉपलॉस - 256

एचओईसी : खरीदें - 127, लक्ष्य - 132, स्टॉपलॉस - 125

जिंदल ड्रिलिंग : खरीदें - 127, लक्ष्य - 132, स्टॉपलॉस - 125

गुजरात पीपावाव : खरीदें - 106.65, लक्ष्य - 109, स्टॉपलॉस - 105

सेंचुरी टेक्सटाइल्स : बेचें - 891.25, लक्ष्य - 900, स्टॉपलॉस - 864

दीवान हाउसिंग : बेचें - 642.5, लक्ष्य - 622, स्टॉपलॉस - 648

बलरामपुर चीनी : बेचें - 66.25, लक्ष्य - 64, स्टॉपलॉस - 67

एग्रो टेक फूड्स : खरीदें - 666.25, लक्ष्य - 686, स्टॉपलॉस - 659

जेएसडब्ल्यू स्टील : बेचें - 318, लक्ष्य - 308, स्टॉपलॉस - 321

तलवलकर्स बेटर वैल्यू : खरीदें - 45.5, लक्ष्य - 47, स्टॉपलॉस - 44

टेस्टी बाइट : खरीदें - 7485, लक्ष्य - 7710, स्टॉपलॉस - 7410

जोडियाक क्लोदिंग : खरीदें - 148, लक्ष्य - 152, स्टॉपलॉस - 146

Wednesday, June 27, 2018

ये ट्रोल्स भस्मासुर हैं, इन्हें मत पालिए

ट्रोल्स के काटे का ज़ख़्म अब तक सिर्फ़ वो लोग सहलाते रहते थे जिन्हें सोशल मीडिया की ज़बान में लिबटार्ड, सिकुलर, ख़ानग्रेसी आदि विशेषणों से पुकारा जाता है. पर अब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी ट्रोल्स के शिकारों की लिस्ट में शामिल हो गई हैं.

सुषमा स्वराज को आप न तो स्यूडो-सेक्युलर कह सकते हैं, न लिबटार्ड या ख़ानग्रेसी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में भले ही उनकी राजनीतिक परवरिश न हुई हो पर वो भारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण नेताओं में हैं.
राजनीति में अपने करियर की शुरुआत से ही वो काँग्रेस विरोधी रही हैं. सोनिया गाँधी से उनकी प्रतिद्वंद्विता के क़िस्से मशहूर रहे हैं. यहाँ तक कि 2004 में एनडीए के चुनाव हारने पर उन्होंने ऐलान कर दिया था कि अगर सोनिया गाँधी प्रधानमंत्री बनीं तो वो अपना सिर मुंडवा लेंगी. ख़ैर उसकी नौबत ही नहीं आई.
फ़िलहाल तो सुषमा स्वराज इसलिए ख़बरों में हैं क्योंकि सोशल मीडिया में अपने शिकार को सूंघते फिरते ट्रोल्स उन्हीं पर झपट पड़े हैं.

क्या है मामला

लखनऊ में एक दंपति ने पासपोर्ट दफ़्तर में अपने साथ हुए व्यवहार की जानकारी ट्विटर के ज़रिए सुषमा स्वराज को दी जिसके बाद तुरंत पासपोर्ट जारी कर दिया गया.
शिकायत करने वाली महिला हिंदू थी और उसने एक मुसलमान से शादी की थी. दंपति का दावा था कि पासपोर्ट दफ़्तर में उनके इस रिश्ते पर सवाल किया गया तो उन्होंने सुषमा स्वराज से न्याय माँगा. उनकी माँग मान ली गई. हालाँकि, ट्रोल किए जाने के बाद सुषमा स्वराज ने कहा कि वो विदेश में थीं और उनकी ग़ैरमौजूदगी में क्या फ़ैसला हुआ इसकी उन्हें जानकारी नहीं है.
दरअसल इस महिला का हिंदू होते हुए मुसलमान से शादी करना ही संघ परिवार की परिभाषा के मुताबिक़ जघन्य अपराध है. इसे संघ की शब्दावली में लव जिहाद कहा जाता है. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता कहते हैं कि लव जिहाद के ज़रिए मुसलमान हिंदुओं की लड़कियों को बहला फुसला कर शादी कर लेते हैं और इस तकनीक से भारत में अपनी संख्या बढ़ाते हैं.
संघ के इस तर्क से सहमत लोगों के नज़रिए से देखा जाए तो लव जिहाद में शामिल हिंदू महिला ने पहले तो सुषमा स्वराज से शिकायत करने की हिमाक़त की और फिर दूसरी हिमाक़त सुषमा स्वराज ने की कि पासपोर्ट जारी कर दिया. माँग में गाढ़ा सिंदूर भरकर रखने वाली जो सुषमा स्वराज कल तक पवित्र हिंदू नारी का प्रतीक हुआ करती थीं, अचानक मुस्लिम परस्त हो गईं.

गरीबों के लिए यूं जीवनरक्षक बनी सरकार की सस्ती दवाओं की नीति

दवाइयों की अपनी दुकान पर बैठे खावर खान यूं तो काफी कम बात करते हैं। लेकिन उस वक्त उनके चेहरे का संतोष देखते ही बनता है, जब वह गरीब मरीजों को बाजार के मुकाबले 20वें हिस्से तक कम दाम में दवाइयां मुहैया कराते हैं। खान बताते हैं, 'एक ऑटोरिक्शा चलाने वाले को हर महीने अपनी पत्नी की दवा के लिए 10,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते थे, जिसमें उसकी लगभग पूरी सैलरी ही खर्च हो जाती थी। मैंने उसे 2,200 रुपये में ही दवाईयां दीं। अब उसके चेहरे के सुकून को देखा जा सकता है।' 

ऑटोरिक्शा वाले को खान की फार्मेसी के बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन अचानक वह दुकान पर पहुंच गए और उन्हें यह सस्ती दवाइयां मिलीं। जेनेरिक मेडिसिन्स की सरकार की ओर से सप्लाई के चलते देश के 5.5 करोड़ लोगों को फायदा हुआ है, जो गरीबी रेखा से नीचे गुजर-बसर कर रहे हैं। 

गार्जियन की रिपोर्ट में पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट्स की ओर से दी गई जानकारी के हवाले से बताया गया कि 5.5 करोड़ लोगों में से 3.8 करोड़ लोग दवाइयों पर हुए बहुत अधिक खर्च के चलते गरीबी रेखा से नीचे खिसक गए। खान का छोटा सा केमिस्ट स्टोर नई दिल्ली के जामिया नगर इलाके की घनी बस्ती में है। केंद्र सरकार की जन औषधि स्कीम के तहत खुले ऐसे तमाम स्टोर देश में गरीब तबके के लिए लाइफलाइन बने हुए हैं। 
इस स्कीम की शुरुआत 2008 में यूपीए सरकार ने की थी ताकि महंगी दवाएं गरीब तबके के लोगों को आसानी से मिल सकें। इसके बाद जब मोदी सरकार आई तो उसने इस स्कीम को और आगे बढ़ाया और स्टोर्स की संख्या देश भऱ में 3,000 तक करने का लक्ष्य लिया। यह संख्या 2014 में महज 97 ही थी। 

सब्जी है तो सलाद नहीं

सब्जी अभी का रेट पहले का रेट 

भिंडी "50 "20

आलू "20 "20

शिमला मिर्च "80 "40

टमाटर "20 "10

फूल गोभी "70 "30

मटर "100 "60

घीया "30 "20

पेठा "20 "15

तोरी "40 "20

पालक "40 "20

खीरा "40 "20

भारत में सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पर मजबूर कर सकता है अटलांटिक तूफान

जब दक्षिणी-पश्चिमी मॉनसून देश के बड़े हिस्से में नुकसान पहुंचा रहा है तो क्या आपको अटलांटिक महासागर में तूफान के चाल-चलन पर नजर रखनी चाहिए? पिछले साल जो हुआ उसके मद्देजनर तो जरूर, अगर आप ईंधन पर हो रहे खर्च की चिंता करते हैं। अटलांटिक महासागर, कैरीबियाई समुद्र और मेक्सिको की खाड़ी वाले इलाके अटलांटिक बेसिन में आधिकारिक तौर पर तूफानी मौसम जून से शुरू होकर नवंबर तक रहता है। वैसे तो घातक तूफान कभी भी दस्तक दे सकता है, लेकिन इसका पीक सीजन मध्य अगस्त से अक्टूबर के आखिर तक का है। 
सरकार ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों एवं वेनेजुएला की ओर से तेल उत्पादन में कटौती से पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर लोगों के अंदर उठे तूफान को तो शांत करने में शायद सफल रही, लेकिन अमेरिका के खाड़ी तट से तूफान उठा तो उसे एक बार फिर इसका सामना करना पड़ सकता है। पिछले वर्ष सितंबर-अक्टूबर महीने में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान पर पहुंच गए थे जब अगस्त के आखिर और सितंबर की शुरुआत में हरिकेन हार्वी और इरमा तेजी से अमेरिका के खाड़ी तट से टकराया। 

लेकिन अमेरिका में उठनेवाले इन तूफानों और भारत में तेल की कीमतों के बीच क्या संबंध है? दरअसल, कच्चा तेल और रिफाइन्ड उत्पादों का वैश्विक व्यापार आपस में जुड़ा हुआ है। मसलन, जब दो तूफानों से खाड़ी तट स्थि अमेरिका की रिफाइनिंग कपैसिटी का एक चौथाई हिस्सा प्रभावित हो गया तो प्रॉडक्ट की ढुलाई का पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर चरमरा गया। 

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका के पास वाहनों में इस्तेमाल होनेवाला 20 करोड़ बैरल ईंधन के भंडार हैं। इससे अमेरिका में तीन हफ्ते तक वाहनों के पहिये घूमते रह सकते हैं, लेकिन ये भंडार पेट्रोल पंपों से बहुत दूर टैंक फार्म्स में हैं। इससे जमीनी स्तर पर ईंधन की कमी हो गई। रिफाइनरियों में कामकाज शुरू होने में देर होने से ईंधन का संकट और बढ़ गया। दरअसल, दोबारा संचालन में आने के बाद भी रिफाइनरियों में क्षमता से कम उत्पादन हुआ। 

यही वजह है कि अमेरिका को पेट्रोल-डीजल का आयात करना पड़ गया। अब जब अमेरिका और ईंधन के लिए उस पर रहनेवाले पड़ोसी देश जरूरी मात्रा में ईंधन की आपूर्ति के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर हो गए तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें दुनियाभर में बढ़ गईं। यहां तक कि अमेरिकी शेयर बाजार में भी ईंधन की कीमतें चढ़ गईं। 

चूंकि भारत में ईंधन की कीमत निर्धारण पद्धति अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपया-डॉलर के एक्सचेंज रेट पर निर्भर है, इसलिए पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ना अवश्यंभावी है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव का भारतीय बाजार पर असर और भी बढ़ चुका है क्योंकि दो महीने पहले सरकारी पेट्रोल पंपों ने पाक्षिक की जगह दैनिक बदलाव का नियम लागू कर दिया।