Wednesday, August 4, 2010

गणित की कक्षा में गुरू जी पढ़ा रहे थे-
"एक नाव में ५०० नेता बैठे थे। बाढ़ में उमगती नदी के कारण नाव उलटी और ३०० पानी में डूब गए। कितने नेता बचे?"
"२०० नेता।" एक छात्र ने उत्तर दिया।
"बचे हुए २०० नेता दूसरी नाव में आगे बढ़े। संयोग से फिर नाव उलट गई और नाव में बैठे सभी नेता डूब गए। अब क्या बचा?"
सभी छात्र जोर से बोले, "देश बच गया।"



पिता ने पुत्र को आत्मनिर्भरता का उपदेश देने के इरादे से कहा, "बेटा, अमेरिका मे पंद्रह साल के बच्‍चे भी अपने पैरों पर खडे हो जाते हैं।"
"लेकिन पिताजी, भारत मे तो एक साल का बच्‍चे भागने भी लगते है।" पुत्र ने गर्व से उत्तर दिया।


मैनेजर साहब मेज पर बैठे आराम से अखबार पढ़ रहे थे। उन्होंने अपना प्याला उठाकर आगे किया और कहा,
"मुझे एक प्याला कॉफी और दो।"
"आज कॉफी ही पीते रहोगे, ऑफिस नहीं जाना है?" पत्नी ने पूछा।
"अरे राम, वे हड़बड़ाकर उठ बैठे, "मैं सोच रहा था कि मैं ऑफिस में बैठा हूँ।"



एक व्यक्ति बाज़ार में एक तोते को नीलम कर रहा था। बोली १०० रुपये तक पहुँचकर छूटी।
खरीददार मुस्कराकर कहने लगा, "खैर, ले लेता हूँ लेकिन इतना बता दें कि यह बोलेगा भी?"
"अजी, यही तो आपके खिलाफ बोली बढ़ा रहा था!" बेचने वाले व्यक्ति ने सौ का नोट झपटते हुए कहा।


एक व्यक्ति पहली पहली बार फुटबाल मैच देखने पहुँचा। खेल को ठीक से समझने के लिये उसने पास बैठे एक अन्य व्यक्ति से पूछा, "ये दोनो छोरों पर जो जाल से घिरा हुआ है वह क्या है?"
वह गोल है। दूसरे व्यक्ति ने उत्तर दिया।
"कमाल है जी, वह तो साफ चौकोर दिख रहा है। क्या वह आपको गोल दिखता है?" पहले व्यक्ति ने संदेह से पूछा।
"नहीं, वह है तो चौकोर लेकिन जब फुटबाल उसमें जाता है तब गोल हो जाता है।"
"यह तो और भी नयी बात है जी, फुटबाल तो पहले से ही गोल होता है वह उसमें जाकर कैसे गोल होगा?" दूसरे व्यक्ति ने आश्चर्य से पहले व्यक्ति को ओर देखते हुए कहा।



मच्छर का नन्हा बच्चा जब अपनी पहली उड़ान पूरी कर के घर लौटा तो उसके माता पिता ने पूछा, "क्यों बेटा, कैसा लगा पहले दिन उड़कर?"
"बहुत ही अदभुत आनंद था पिताजी... खास बात तो यह थी कि सभी मनुष्य जाति मेरी इस पहली उड़ान का ताली बजाकर स्वागत कर रहे थ, मैं जिधर भी जाता लोग तालियाँ बजा रहे थे।"
मच्छर के बच्चे ने उत्साहपूर्वक बताया।



चुनाव के दिन थे और दिन भर अलग अलग पार्टियों के प्रचार में लगे कुछ युवक युवती शाम को साथ मिलकर विश्राम चाय की छुट्टी का आनंद ले रहे थे। समय का लाभ उठाते हुए एक युवक ने अपनी मनपसंद युवती को प्रसन्न करने के लिए कमल का फूल उपहार में दिया।
लड़की को यह पसंद न आया और उसने पलट कर एक जोरदार तमाचा युवक के गाल पर जड़ दिया।
युवक ने बात संभालते हुए कहा, "आप तो बेकार ही नाराज़ हो गयीं। मैंने तो सिर्फ अपनी पार्टी भजपा का प्रचार कर रहा था।"
"अरे इसे आप मेरी नाराज़गी न समझें। मैं भी सिर्फ कांग्रेस का प्रचार ही कर रही थी।" लड़की ने उत्तर दिया।



"वकील साहब उसने मेरा बहुत आपमान किया है। आप मेरी तरफ़ से मानहानि का दावा कर दीजिए।"
"शांति रखें महाशय सारी बातें शुरू से बताएँ।"
"शुरू क्या और आखीर क्या उसने सबके सामने मुझे गालियाँ दी और कहा जहन्नुम में जाओ।"
"फिर आपने क्या किया।"
"मैं क्या करता सीधा आपके पास चला आया।"



एक दरवाज़े पर घंटी लगी थी, जिस पर लिखा था डॉक्टर के लिए घंटी बजाएँ।
आधी रात को एक शराबी उधर से निकला। उसने घंटी देखी फिर उसके ऊपर लिखी पंक्ति को पढ़ा और फिर घंटी बजाने लगा। थोड़ी देर बाद दरवाजा खुला और आँखें मलता हुआ एक व्यक्ति बाहर निकला।
"आप डॉक्टर हैं?" शराबी ने पूछा।
"हाँ।"
"यह घंटी आप खुद नहीं बजा सकते?"



पति पत्नी मे पैसे के महत्त्व को लेकर बहस चल रही थी। पति उत्तेजना से बोला, सब कुछ पैसे पर टिका है। यहाँ तक कि यह घर भी।
पत्नी ने शांति से उत्तर दिया, "सिर्फ घर ही क्यों, मै भी।"



मालिक ने नया नौकर रखते समय पूछा- "इस बात का तुम्हारे पास क्या सबूत है कि तुमने जगन्नाथ बाबू के यहाँ एक साल तक खाना पकाने का काम किया है।"
नौकर ने मालिक को विश्वास दिलाते हुए उत्तर दिया-
"मेरे पास एसे कई बर्तन है हुज़ूर जिन पर उनका नाम खुदा है।"



मेजबान टीम का कप्तान अम्पायर को समझा रहा था, "आप इस मैच के अम्पायर हैं। वैसे तो मैं आपसे समझदारी की अपेक्षा करता हूँ, पर आपकी जानकारी के लिए बता दूँ कि मैदान के साथ की इमारत अस्पताल है। दूसरी ओर नदी बह रही है जिसमें गिरने के बाद कोई नहीं बचा है और इस मैदान में आज तक मेरी टीम कोई मैच हारी नहीं है।"


दो व्यापारी आपस में बात कर रहे थे। पहले ने दूसरे से कहा- "टी वी और पत्र पत्रिकाओ में आने वाले विज्ञापनो से पिछले सप्ताह मुझे बहुत नुकसान ऊठाना पड़ा।
"लेकिन तुम तो कभी विज्ञापन नहीं देते।" दूसरे व्यापारी ने अचरज से पूछा
"हाँ मैं तो नहीं देता मगर दूसरे तो देते हैं न, और मेरी पत्नी व बच्चे उन्हें देखते ही हैं।" पहले व्यापारी ने बात को स्पष्ट करते हुए कहा।



"क्या आप जानते हैं कि जेल को हवालात क्यों कहते हैं?"
"क्योंकि वहाँ खाने को केवल हवा और लात ही मिलती है!"


एक पिता और पुत्र आपस में बात कर रहे थे-
"अगर मैं एक केले को बीच में से काट दूँ तो क्या बन जाएगा?"
"दो टुकड़े।"
"बहुत अच्छे! फिर उसके दो टुकड़े कर दूँ तो?"
"चार।"
"शाबाश! उनके भी दो टुकड़े कर दूँ तो?"
"आठ।"
"उनके भी दो कर दूँ तो?"
"सोलह।"
"उनके भी..."
बेटे ने बीच में ही पिता की बोत काट दी- "हे... हे... अब तो चटनी बन जाएगी।"

२६ अप्रैल २०१०

एक मनोवैज्ञानिक कार्यक्रम के लिए चुनाव करते समय रेडियो स्टेशन के कार्यक्रम अधिशासी ने प्रत्याशी से पूछा,
"तुम्हारा मनपसंद विषय क्या है?"
"हास परिहास।" प्रत्याशी ने उत्तर दिया।
"कुछ कर के दिखा सकते हो?" अधिशासी ने पूछा।
प्रत्याशी तत्काल अपने स्थान से उठा और कमरे से बाहर आकर प्रतीक्षा करते अन्य प्रत्याशियों से बोला, "भाइयों, अब आप अपने घर वापस जाएँ, मैं चुन लिया गया हूँ।"

और उसे सचमुच चुन लिया गया।



वकील ने एक गवाह से जिरह में पूछा, हाँ तो यह बताओ कि जिन सीढ़ियों पर तुमने चोर को देखा वे सीढ़ियाँ कहाँ जाती हैं।
गवाह की कुछ समझ में न आया और वह सिर खुजाने लगा।
वकील ने प्रश्न दोहराया।
गवाह कुछ सचेत हो बोला, सीढ़ियाँ कहाँ जाएँगी हुजूर। सिर्फ़ चोर ही उन्हें फँलागता हुआ फ़रार हो गया।



चिड़ियाघर में घूमने आए एक पर्यटक ने देखा कि एक कर्मचारी कोने में बैठा फफक-फफककर रो रहा है। उसे इस प्रकार रोता देख उसने दूसरे कर्मचारी से पूछा- "यह क्यों रो रहा है भाई?"
"चिड़ियाघर में एक हाथी मर गया है, महोदय।" दूसरे कर्मचारी ने उत्तर दिया।
"ओह, इस कर्मचारी को उस हाथी से बहुत लगाव होगा?" पर्यटक ने बात को समझने की कोशिस करते हुए कहा।
"यह बात नहीं है महोदय, इस कर्मचारी को हाथी दफनाने के लिए गड्ढा खोदने का काम दिया गया है।" दूसरे कर्मचारी ने उत्तर दिया।



मुझे यह कार ख्ररीदे दो साल से अधिक हो चले हैं, लेकिन आपको यह जान कर हैरत होगी कि अभी तक इस की सर्विसिंग और मरम्मत का मैने एक भी पैसा नही दिया है।’
"जी नही, बिलकुल हैरत नही हुई।"
"क्यों?"
क्योकि मुझे सर्विस स्टेश्‍न के मालिक ने पहले ही बता दिया था कि आपने दो साल से उसके बिलों का भुगतान नही किया है।"



"सर, अँग्रेजी के अध्यापक अँग्रेजी में बात करते हैं और हिंदी के हिंदी में फिर आप गणित में बात क्यों नहीं करते?" एक विद्यार्थी ने अध्यापक से पूछा।
"ज्यादा तीन पाँच न कर, फौरन नौ दो ग्यारह हो जा, वरना छठी का दूध याद करा दूँगा।" गणित के अध्यापक ने उत्तर दिया।



"सुना है महिला आरक्षण विधेयक राज्यसभा में पारित हो जाने के बाद महिलाओं के संसद में तैंतीस प्रतिशत सीटें मिल जाएँगी।"
"हाँ वह तो है।"
"तो क्या पुरुष अपने लिए किसी आरक्षण की माँग नहीं करेंगे?"
"क्यों नहीं, वे भी माँग कर सकते हैं तैंतीस प्रतिशत सीटों की।"
"यह तो बड़ी अजीब बात हुई!"
"इसमें अजीब क्या है?"
"अच्छा तो मान लो तैंतीस प्रतिशत महिलाओं की सीटें और तैंतीस प्रतिशत पुरुषों की तो कुल मिलाकर छाछठ प्रतिशत सीटें। अब बाकी जो चुनकर आएँगे उन्हें हम क्या कहेंगे?"


पत्नी ने सुबह उठकर पति से कहा, "मैने आज सपनो मे देखा है कि तुम मेरे लिए हीरों का हार लाए हो, इस सपने का क्या अर्थ हो सकता है?"
"आज शाम को बताऊँगा।" पति ने उत्तर दिया।
शाम को पति ने एक पैकेट पत्नी को लाकर दिया। पत्नी ने खुशी-खुशी पैकेट खोला तो उस मे एक किताब निकली। किताब का नाम था- 'सपनों के अर्थ'।



होली का दिन था। क्लब में त्योहार मनाने की व्यवस्था थी होली खेलने, नहाने और खाने पीने का सब प्रबंध किया गया था। अच्छा हंगामा जमा और मधुर मधुर टुन्न होने के बाद घर को लौटते समय एक सज्जन ने क्लब से पुलिस को फोन पर घबराई हुई आवाज में रपट लिखवाई,
"मेरी कार का क्लच, एक्सिलेटर, डैशबोर्ड आदि सब चोरी हो गए हैं।"
पुलिस स्टेशन पर तैनात अधिकारी ने रपट लिखकर सब कुछ जल्दी ढूँढ देने का वायदा किया।
फोन रखते ही फिर से घंटी बजी। पुलिस अधिकारी ने फोन उठाया, वही सज्जन बोल रहे थे,
"माफ़ कीजिएगा दरोगा जी, सब कुछ सलामत है। मैं ही गलती से पिछली सीट पर बैठ गया था।" १ मार्च २०१०
किसी भोज में कई देशों के नागरिक सम्मिलित हुए। अचानक एक अमेरिकी नागरिक ने भारतीय नागरिक से कहा, 'देखिए आपकी सफेद पतलून पर कॉफी के दाग लग गए हैं। इन्हें साफ़ कर लीजिए।"
यह सुनकर भारतीय नागरिक ने झल्लाते हुए कहा, "तुम अमेरिकी सदा दूसरों के निजी मामलों में हस्तक्षेप करते हो। तुम्हारी सिगरेट से तुम्हारा कोट पिछले पंद्रह मिनट से जल रहा है, किंतु मैंने तो तुमसे कुछ नहीं कहा।



एक सज्जन फूलों की दूकान पर गए और एक जोड़ी फूलों के गुच्छों का मूल्य पूछा।
"दोनो के १०० रुपये लगेंगे।" दूकानदार ने कहा।
सज्जन पुनः बोले, "इस एक पुष्पगुच्छ का क्या मूल्य होगा?"
" साठ रुपए होंगे एक के।" दूकानदार ने उत्तर दिया।
"तो फिर यह लो चालीस रुपये और दूसरा पुष्पगुच्छ मुझे दे दो।" सज्जन ने झट से निर्णय लिया।



घड़ी साज़ काम के बाद शाम को घर लौटा तो देखा पत्नी किसी ज्योतिषी से बात कर रही है। वह चुपचाप साथ में बैठकर उनकी बातें सुनने लगा। ज्योतिषी किसी बुरी घड़ी की बात कर रहा था। फिर उसको सुधारने के कठिन उपाय बताने लगा। घड़ीसाज़ सबकुछ सुनने के बात शांति से बोला,
"घड़ियों के मामले में मुझसे साँठ-गाँठ कर लो। खराब घड़ियों को सुधारना मैं भी जानता हूँ।"



दूकान पर एक ग्राहक बहुत देर से टहल रहा था। कभी कोई चीज उठाता, उसे देखता, फिर उसे रखकर दूसरी चीज उठा लेता। किसी वस्तु के दाम पूछता तो किसी वस्तु के अन्य रंग या आकार हैं या नहीं यह जानना चाहता। इस सबके बावजूद वह खरीद कुछ भी नहीं रहा था। काफी देर तक उसका यही व्यवहार रहा तो दुकानदार ने खीझ कर पूछा - "श्रीमान जी, आखिर आपको चाहिए क्या?
"मौका!" ग्राहक बुदबुदाते हुए कहा।



गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में समारोह के बाद शर्माजी अपने नेता मित्र से बात करते हुए बोले-
यार आजकल मैं अपने बेटे सुकुमार को लेकर बहुत परेशान हूँ। उसका विकास रुक गया है, अच्छा खाने-पीने पर भी यह स्वस्थ नहीं हो रहा है। किसी अच्छे डॉक्टर का नाम बताओ।
नेता जी ने हँसते हुए उत्तर दिया- डॉक्टरो के पास जाने से कुछ नहीं होगा। इसका नाम भ्रष्टाचार रखो। फिर देखना इसका विकास किस रफ्तार से होता है।-----------------------------------------------------------

एक छोटा सा देश था, उसकी समस्याएँ बहुत अधिक थीं। मीटिंग हुई, 'इन्हें कैसे दूर किया जाए?'
पहला व्यक्तिः अमेरिका पर हमला कर दो।
दूसराः उससे क्या फ़ायदा?
पहलाः 'लड़ाई होगी, वह जीत जाएँगें। हमारी सारी समस्याएँ उनकी हो जाएँगी।'
सभी व्यक्तियों ने अपनी सहमति प्रकट कर दी।
जब सब उठने लगे तो एक बोला- 'लेकिन अगर हम जीत गए तो?'--------------------------------------

कोर्ट में जिरह करते वकील गवाह की हरकतों से परेशान हो गए थे। गवाह सवालों के जवाब देने की बजाय कभी नाक-भौं चढ़ाता, तो कभी उछल-कूद करने लगता।
आखिर परेशान वकील ने उससे कहा- "देखो, यह उछलकूद और नौटंकी बहुत हो गई, अब मुझे हर सवाल का जवाब मुँह से बोलकर चाहिए। साफ़ साफ़ बताओ कि तुम्हारी मुलाकात इस औरत से कैसे हुई?"
"मुँह से बोलकर..!" गवाह ने उत्तर दिया।----------------------------------------------------------------------

बेटे ने पिता से पूछा, "पिताजी, ज्यादा योग्य कौन है मैं या आप?"
पिता ने कहा मैं, "क्यों कि मैं एक तो तुम्हारा पिता हूँ, दूसरे उम्र में तुम से बड़ा हूँ और तीसरे जीवन का मेरा अनुभव भी तुम से ज्यादा है।"
"फिर तो आप जानते ही होगें कि अमेरिका की खोज किस ने की थी?" बेटे ने पूछा।
"बिलकुल जानता हूँ, कोलम्बस ने की थी।" पिता ने उत्तर दिया।
"कोलम्बस के पिता ने क्यों नही की? उसका अनुभव और उम्र तो कोलम्बस से कही ज्यादा होगे?" बेटे ने तपाक से पलट कर प्रश्न किया।

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