Tuesday, August 10, 2010

अब जान बचाएगा मोबाइल


 

 
वाशिंगटन. रासायनिक प्रदूषण आज एक वास्तविक समस्या। जहरीले रसायनिक पदार्थो के संपर्क में आने से कई जाने बेवजह चली जाती हैं। अब इस समस्या से बचने का आसान तरीका सामने आया है। जी हां वैज्ञानिकों ने एक ऐसे मोबाइल फोन का विकास किया है जो लोगों को टॉक्सिक रसायनों से बचाने में मददगार साबित हो सकता है।

सेंसर लगा हुआ यह स्मार्ट फोन खतरनाक रसायनों के खिलाफ एक सुरक्षा कवच का काम करेगा। अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी साइंस एंड टेक्नोलॉजी डायरक्टरेट ने सेल-ऑल नाम के इस स्मार्ट फोन को डिजायन किया है जिसमें ऐसे सेंसर लगे हुए हैं जो घातक रसायनों का पता लगा सकते हैं। इस फोन में एक चिप लगाया गया है जिसकी कीमत एक डॉलर से भी कम है।

इस चिप को इस तरह से प्रोग्राम किया गया है कि वह वह मोबाइल यूजर को हवा में टॉक्सिक रसायनों के बारे में सूचना दे देगा। सेल ऑल के प्रोग्राम मैनेजर स्टीफन डेनिस ने कहा कि हमारी कोशिश एक कम वजन के , सस्ते और कम बिजली का खपत करने वाले सेंसर का निर्माण करना है। उनके अनुसार जिस तरह से कंप्यूटर में एंटी-वायरस काम करता है उसी तरह यह भी काम करेगा और किसी तरह के खतरनाक केमिकल के दायरे में आने पर सक्रिय हो जाएगा।वैज्ञानिकों के मुताबिक सेल-आल दो तरह से काम करेगा। क्लोरीन गैस के रिसाव जैसे मामलों में जहां व्यक्तिगत स्तर पर खतरा होता है, यह यूजर को अलर्ट करेगा।

यह अलर्ट वाइव्र्रेशन, आवाज या टेक्स्ट मैसेज के रूप में हो सकता है। सारिन गैस के हमले जैसे मामलों में, जहां बड़ी आबादी पर रसायनों के दुष्प्रभाव के जद में आ सकते हैं यह चिप अपने यूजर की जगह इमरजेंसी नंबर पर फोन करेगा। इसमें सारी सूचनाएं मसलन जगह, समय आदि के बारे में जानकारी दी जाएगी। और क्योंकि सारे आंकड़े डिजिटल रूप में पैदा होंगे और भेजे जाएंगे इसलिए यह उम्मीद की जा रही है कि इसमें मानवीय भूल की गुंजायश कम हो जाएगी। एक बड़ा फायदा यह है कि एक ही बार कई लोगों के द्वारा सूचना दिए जाने से गलत अलार्म का भी खतरा नहीं रहेगा।

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